Daily News
Sunday, 31 August, 2014
 |   |   |   |   |   |   |   |   |   |   | 
परिश्रम का महत्व
Tuesday, June 26, 2012, 11:58 hrs IST
Email Print Comment min  max | Bookmark and Share
हातिमताई अपनी दानशीलता के लिए काफी प्रसिद्ध थे। दूर-दूर से लोग उनके पास आते, लेकिन कोई भी उनके पास से खाली झोली लिए नहीं जाता था। एक दिन हातिम के कुछ मित्रों ने बातचीत के दौरान उनसे पूछा- "हातिम, क्या तुम किसी ऎसे व्यक्ति को जानते हो, जो तुमसे भी श्रेष्ठ हो।" हातिम ने सहमति में सिर हिलाया। मित्र चौंक गए। उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने जानना चाहा कि वह आखिर कौन है?

हातिम ने उत्तर दिया- "एक दिन मैंने बहुत बड़ा भोज दिया और उसमें हजारों लोगों को आमंत्रित किया। दिन भर दावत चलती रही। शाम को मैं जंगल की ओर घूमने गया। वहां मैंने एक लकड़हारे को देखा, जिसने लकड़ी का एक भारी गट्ठर सिर पर उठा रखा था। मैंने उससे पूछा, "तुम आज हातिम के भोज में शामिल क्यों नहीं हुए? कम से कम आज इतनी मेहनत करने की क्या जरूरत थी?

तब लकड़हारे ने जवाब दिया- "मुझे लगता है कि जो लोग अपने जीविकोपार्जन में स्वयं समर्थ हैं, उन्हें हातिम की दानशीलता पर, उसकी कृपा पर रहने की कोई जरूरत नहीं है। मैं तो अपनी मेहनत से जो कुछ अर्जित करता हूं उसी से अपना पेट भरना चाहता हूं।" यह वृत्तांत सुनाकर हातिमताई ने कहा- "मैं उस लकड़हारे को खुद से ज्यादा श्रेष्ठ मानता हूं। उन दानियों की अपेक्षा जो दूसरों को दान देकर पुण्य कमाना चाहते हैं या उन व्यक्तियों की अपेक्षा जो दूसरों से दान मिलने की आशा में सबका मुंह ताकते रहते हैं, स्वयं परिश्रम कर अपना पेट भरने वाला ज्यादा अच्छा है।
More Stories Top News
vyavahar news आधा आम
vyavahar news सच्चा साधक
vyavahar news तीन सवाल
vyavahar news अनूठा यज्ञ
vyavahar news देश सेवा
vyavahar news बच्चे की जिद
vyavahar news झूठी शान
vyavahar news सांपों की मौत
vyavahar news संत का जवाब
vyavahar news भाग्य का खेल
Copyright © Daily News. All rights reserved.